RESEARCH MISCONDUCT अनुसंधान कदाचार
- Mridula Sharma
- Jan 22, 2025
- 2 min read
अनुसंधान कदाचार (RESEARCH MISCONDUCT)
शोध कदाचार को ऐसे कार्यों या संदिग्ध शोध प्रथाओं के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो नैतिकता, शोध और छात्रवृत्ति मानकों की दृष्टि से कमतर हैं । शोध कदाचार के कारण शोध की अखंडता संकट में पड सकती है। यह शोध की अखंडता समाप्त करता है। इसी के साथ यह लोगों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है, संसाधनों का दुरुपयोग कर सकता है, शोध रिकॉर्ड को कमजोर कर सकता है और शोध की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है।
अनुसंधान के दौरान निम्नलिखित क्रियाएं अनुसंधान कदाचार के अंतर्गत आती है -
1. गलत अवलोकन/डेटा रिकॉर्ड करना
2. गलत विश्लेषण करना
3. अपर्याप्त रिकार्ड रखना
4. विधियों का विवरण रोकना
5. डुप्लिकेट और अधुरा प्रकाशन
6. उपयुक्त प्राधिकारियों को सूचित किए बिना, अध्ययन डिजाइन का पक्षपातपूर्ण या पोस्ट-हॉक संशोधन
7. दूसरों के पिछले काम को नज़रअंदाज़ करना या अनदेखा करना
8. स्वयं का डेटा दबाना (dropping data points)
9. हितों के टकराव की घोषणा करने में विफलता
10. सहमति के बिना लेखकत्व की सहमति
11. अयोग्य लेखकत्व (शक्ति/उत्पीड़न द्वारा लेखकत्व प्राप्त करना शामिल है)।
12. योग्य व्यक्तियों को गलत तरीके से लेखकत्व से वंचित करना
13. सार्वजनिक धन का दुरुपयोग (अनुसंधान अनुदान)
14. त्रुटिपूर्ण डेटा के दूसरों के उपयोग को नजरअंदाज करना या अनदेखा करना
15. उचित वैज्ञानिक सलाहकार समिति और संस्थान आचार समिति से अनुमति न लेना
16. डेटा की चोरी/मिथ्याकरण (Plagiarism/ Falsification/ fabrication)
· साहित्यिक चोरी(Plagiarism) - उचित श्रेय दिए बिना दूसरे के विचारों, प्रक्रियाओं, डेटा या पाठ का उपयोग करना साहित्यिक चोरी है।
· मिथ्याकरण (Falsification) - शोध सामग्री, उपकरण, प्रक्रियाओं, आउटपुट और आंकड़ों में बदलाव करके डेटा/परिणामों में हेरफेर करना, जिससे शोध रिपोर्ट में गलत प्रतिनिधित्व होता है, मिथ्याकरण है।
· छलरचना (fabrication) - निर्माण डेटा या परिणाम बनाना और उन्हें रिकॉर्ड करना या रिपोर्ट करना है
17. अनैतिक प्रकाशन प्रथाएँ जैसे कि एक पांडुलिपि को एक से अधिक पत्रिकाओं में एक साथ प्रस्तुत करना, एक शिकारी पत्रिका में प्रस्तुत करना, डुप्लिकेट प्रकाशन, कटे हुए प्रकाशन, शोध दल के योग्य सदस्य को लेखकत्व से वंचित करना और उपहार में लेखकत्व देना।
नैतिक कदाचार के प्रकार
नैतिक कदाचार मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं-
1. साहित्यिक चोरी(Plagiarism)
2. मिथ्याकरण (Falsification)
3. छलरचना (fabrication)
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