Review Of RelatedLiterature In Hindi
- Mridula Sharma
- Apr 17
- 3 min read
IMPORTANT NOTES ON RESEARCH
(NET/P.hD)
(हिंदी में शोध नोट्स)
BY- Dr. Mridula Sharma
अध्याय 2: साहित्य समीक्षा (Literature Review)
PhD थीसिस का दूसरा अध्याय साहित्य समीक्षा होता है। इसमें निम्नलिखित भाग शामिल होते हैं:
1. अध्याय का परिचय (Introduction to the Chapter)
· यह भाग सामान्यतः एक पैराग्राफ का होता है
· इसका उद्देश्य पाठकों को यह बताना होता है कि इस अध्याय में क्या-क्या शामिल है
2. सैद्धांतिक समीक्षा (Theoretical Review)
· इस भाग में शोधार्थी को अपने शोध विषय से संबंधित सिद्धांतों की समीक्षा करनी होती हैI इसमें यह बताया जाता है कि:
👉 सिद्धांत कैसे विकसित हुआ
👉 उसके मुख्य तर्क क्या हैं
👉 उस सिद्धांत का उपयोग अध्ययन की समस्या को समझने में कैसे किया गया है
· किसी एक विषय को समझाने के लिए कई सिद्धांत हो सकते हैंI छात्र को सभी प्रमुख सिद्धांतों की समीक्षा करनी चाहिएI अंत में उस मुख्य सिद्धांत का उल्लेख करना चाहिए जो उसके अध्ययन का आधार बनेगा, साथ ही उसके चयन का औचित्य भी देना चाहिए
3. अनुभवजन्य समीक्षा (Empirical Review)
· अध्ययन से संबंधित सिद्धांतों और मॉडलों की चर्चा करने के बाद, शोधार्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी समस्या से संबंधित अनुभवजन्य अध्ययनों की समीक्षा करे।
· अनुभवजन्य साहित्य उन मूल शोध अध्ययनों को संदर्भित करता है, जो अन्य शोधकर्ताओं द्वारा डेटा संग्रह और विश्लेषण के माध्यम से किए गए हैं। इन अध्ययनों के निष्कर्ष सिद्धांतों के बजाय डेटा पर आधारित होते हैं।
· इस भाग में केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि अन्य शोधकर्ताओं ने क्या किया और क्या पाया, बल्कि इसमें आलोचनात्मक सोच और विश्लेषण आवश्यक है। शोधार्थी को अन्य समान अध्ययनों का संदर्भ देते हुए उनकी समीक्षा करनी चाहिए।
· यदि एक ही विषय पर दो अध्ययनों के निष्कर्ष अलग-अलग हों, तो शोधार्थी को यह विश्लेषण करना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ, जैसे:
👉 अध्ययन की जनसंख्या अलग हो सकती है
👉 पद्धति अलग हो सकती है आदि
· अनुभवजन्य साहित्य को व्यवस्थित करने के दो तरीके
1)कालानुक्रमिक (Chronological) 2) विषयानुसार (Thematic)
1) कालानुक्रमिक संगठन- इस विधि में साहित्य को प्रकाशन तिथि (date of publication) के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है
👉 पुराने से नए (latest) तक
इसका लाभ:
👉 इससे यह समझ में आता है कि समय के साथ विषय का ज्ञान कैसे विकसित हुआ है
इसकी सीमा:
👉 चर्चा का प्रवाह (flow) सुचारु नहीं रहता
👉 समान विषय के अध्ययन अलग-अलग जगह बिखर जाते हैं
2) विषयानुसार संगठन- इस विधि में अध्ययनों को अध्ययन के चरों या विषयों के आधार पर व्यवस्थित किया जाता हैI प्रत्येक चर (variable) के लिए अलग सेक्शन बनाया जाता है और उससे संबंधित सभी अध्ययनों को एक साथ प्रस्तुत किया जाता हैI इसमें यह भी बताया जाता है:
👉 अध्ययनों में कहाँ सहमति है
👉 और कहाँ असहमति है
लाभ-
· साहित्य समीक्षा का प्रवाह बेहतर और स्पष्ट होता है
· शोध अंतराल पहचानना आसान हो जाता है
👉 इसलिए PhD स्तर पर thematic method अधिक उपयोगी माना जाता है
4. संकल्पनात्मक ढाँचा का विकास
· सैद्धांतिक और अनुभवजन्य समीक्षा के बाद, शोधार्थी को अपना संकल्पनात्मक ढाँचा विकसित करना होता हैI यह एक चित्रात्मक प्रस्तुति होती है, जो अध्ययन के चरों और उनके बीच संबंधों को दर्शाती है
· संकल्पनात्मक ढाँचा साहित्य समीक्षा के आधार पर विकसित किया जाता है।
· इसे विकसित करने के तीन मुख्य चरण होते हैं:
i. अध्ययन में विश्लेषण किए जाने वाले सभी चरों की पहचान करें
ii. साहित्य समीक्षा के आधार पर इन चरों के बीच संबंध निर्धारित करें
iii. इन चरों और उनके संबंधों को दर्शाते हुए एक आरेख तैयार करें
5. शोध अंतराल (Research Gaps)
· साहित्य समीक्षा का मुख्य उद्देश्य यह समझना होता है कि
👉 क्या ज्ञात (known) है
👉 और क्या अज्ञात (unknown) है
· शोध अंतराल वे बिंदु होते हैं जिन पर अभी तक पर्याप्त शोध नहीं हुआ हैI नया ज्ञान का योगदान इन्हीं अंतरालों को भरने से होता हैI
शोध अंतराल के प्रकार (Types of Research Gaps)
1)अवधारणाओं/चरों में अंतराल
उदाहरण:
👉 अधिकांश शोध मातृ स्वास्थ्य (maternal health) में केवल गर्भावस्था और प्रसव पर केंद्रित हैं
👉 लेकिन प्रसव के बाद (post-partum period) पर कम शोध हुआ है
👉 इसलिए आप इस विषय पर अध्ययन कर सकते हैं
2) अध्ययन के क्षेत्र में अंतराल
इसमें शामिल हैं:
i)भौगोलिक अंतर (Geographical):
👉 ग्रामीण बनाम शहरी, विकसित बनाम विकासशील देश
ii)समय (Time):
👉 पुराना बनाम नया अध्ययन
iii)जनसांख्यिकी (Demographics):
👉 पुरुष बनाम महिला
👉 शिक्षित बनाम अशिक्षित
👉 मध्यम वर्ग बनाम निम्न वर्ग
3) शोध पद्धति में अंतराल
इसमें शामिल हैं:
i)शोध डिजाइन:
👉 मात्रात्मक बनाम गुणात्मक या मिश्रित
ii)डेटा संग्रह विधि:
👉 प्रश्नावली (questionnaire), साक्षात्कार (interview), समूह चर्चा (focus group)
iii)डेटा विश्लेषण तकनीक:
👉 वर्णनात्मक (descriptive) बनाम अनुमानात्मक (inferential statistics)
BY- Dr. Mridula Sharma
Associate Professor/Research Guide/Academic consultant
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